Key Highlights
- सांदर्भिक जनगणना में जाति सूची समावेश का निर्णय, न कि अलग सर्वेक्षण।
- अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस एवं संबद्ध दलों पर राजनीतिक शोषण का आरोप।
- पारदर्शी, राष्ट्रीय स्तर की पद्धति से पूर्व के संदेहों को दूर करने की योजना।
- बारह-तारिक 2023 में बिहार ने पहला राज्यीय स्वतंत्र जाति सर्वेक्षण शुरू किया; कर्नाटक ने इसके पश्चात प्रयास किया पर उसे विरोध का सामना करना पड़ा।
- यह बहस ब्रिटिश भारत के 1931 के अंकन और 2011 के SECC से उत्पन्न हुई।
Detailed Insights
भारत का सदी-भर जनगणना 1871 से हर दस वर्ष में आयोजित किया जाता है। 2011 के पूर्ण जनगणना के पश्चात 2021 की योजना को कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित किया गया। 2011 के दौरान Socio‑Economic and Caste Census (SECC) सर्वेक्षण किया गया, परंतु जाति संबंधी आंकड़ों को आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया, क्योंकि डेटा विश्वसनीयता और राजनीतिक संवेदनशीलता के मुद्दे थे। 1931 में ब्रिटिश भारत ने अंतिम बार पूर्ण जाति अंकन किया। 2023 में बिहार ने अपनी पहली स्वतंत्र राज्यीय जाति जनगणना शुरू की, जिससे अन्य राज्यों के लिए मिसाल स्थापित हुई। उसी वर्ष कर्नाटक ने अपनी राज्यीय सर्वेक्षण के साथ आगे बढ़ा, परंतु वोक्कलिगा एवं लीङायत समुदायों के विरोध के कारण उसके डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
Key Concepts
- Caste Census – एक राष्ट्रीय या राज्यीय सर्वेक्षण जो जाति वांशिक आधार पर जनसंख्या का आँकड़ा एकत्रित करता है।
- Decennial Census – दस वर्ष के अंतराल पर भारत द्वारा संचालित संपूर्ण जनसंख्या गणना।
- Socio‑Economic and Caste Census (SECC) – 2011 में आयोजित विस्तृत सामाजिक‑आर्थिक डेटा संग्रह, जिसकी जाति आँकड़े राजनीतिक कारणों से जारी नहीं हुए।
- Political Manipulation – जाति डेटा का उपयोग राजनीतिक लाभ हेतु किया जाना।
- Social Cohesion – समाज में एकसाथ रहने और ऐक्य की स्थिति, जिसे जातिगत विभेद कम करके बढ़ाया जा सकता है।